Saturday, January 16, 2021

राजनितिक विज्ञान का सिद्वान्त

समाज द्वारा सुसंकृत मनुष्य सब प्राणियों में श्रेष्ठतम होता है  परंतु जब वह कानून तथा न्याय के बिना जीवन व्यातीत करता है तो वह निकृष्णतम हो जाता है । यदि कोई मनुष्य ऐसा है जो समाज में न रह सकता हो अथवा जिसे समाज की आवश्यकता ही नहीं क्योकि वह अपने आप में पूर्ण है । तो उसे मानव समाज का सदस्य मत समझों वह जगली जानवर या देवता ही हो सकता है । चूंकि राज्य का अध्ययन ही राजनितिक विज्ञान है । राजनिति विज्ञान समाज का वह विज्ञान है । जिसके अंतर्गत मानवीय जीवन की राजनितिक पक्षों के साथ साथ सामाजिक, आर्थिक , शैक्षिक तथा स्थानीय , राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय तथा भूत , वर्तमान और भविष्य सबका अध्ययन करती है ।

राजनितिक विज्ञान की परिभाषा

परंपरागत परिभाषा

 

-  राजनितिक विज्ञान केवल राज्य के अध्ययन के रुप में है ।
-  राजनितिक विज्ञान केवल सरकार के अध्ययन है।

- राजनितिक विज्ञान राज्य वा सरकार के अध्ययन है ।

मानव के राजनितिक जीवन का अध्ययन करने के लिए उन संस्थाओं का ज्ञान प्राप्त करना अनिवार्य हो जाता है । जिनके अंतर्गत मानव ने अपना राजनिति जीवन प्रारम्भ किया हो और जिनके माध्यम से वह अपने राजनितिक जीवन का विकास करता है ।इस प्रकार की राजनिति में राज्य प्रमुख है ।

       राजनिति का अंग्रेंजी में अनुवाद Politics होता है । जो यूनानी भाषा के Polish  शब्द से बना है । यूनानी नगर छोटे छोटे नगर राज्यों में विभक्त थे । इस प्रकार यूनानियों के लिए नगर  और राज्य में कोई अन्तर नही था । बाद में धीरे धीरे स्वरुप बदला और इन नगरों राज्यों का स्थान राष्ट्रीय राज्यों ने लिया । इसी बदले हुए स्वरुप का अध्ययन करना ही  राजनिति विज्ञान कहा जाने लगा । इसीलिए गार्नर के कहा कि “राजनिति विज्ञान के विषय के अध्ययन का प्रारम्भ और अन्त राज्य के साथ ही होता है ”।

राजनिति का अध्ययन सरकार का अध्ययन हैः-

वर्तमान  समय में विभिन्न विद्वान राज्य के स्थान पर सरकार के अध्ययन पर बल देते है ।क्योंकि उनका मानना है कि राज्य एक अमूर्त इकाई है जो राज्य का ही मूर्त रुप सरकार है । शीले ने भी माना है “ राजनिति विज्ञान उसी प्रकार सरकार के तत्वों का अध्ययन करता है जैसे सम्पत्ति शास्त्र सम्पत्ति का , जीवनशास्त्र जीवन का , बीजगणित अंको का तथा ज्यामितीय स्थान वा लंबाई का, चौथाई का  अध्ययन करता है । राजनिति विज्ञान सरकार का अध्ययन है । 

उपरोक्त दोनों की परिभाषा एकांगी एक पक्षीय है । जहाँ इसका सम्बन्ध राज्य से है वहाँ व्यापारिक व्यवस्थाँए गौण हो जाती है  और जहाँ इसका अध्ययन सरकार को सम्बोधित है तो बिना राज्य के सरकार की कल्पना नही की जा सकती है ।अर्थात राज्य की क्रियात्मक अभिव्यक्ति के लिए सरकार का और सरकार के अस्तित्व के लिए राज्य का अस्तित्व अनिवार्य है । ऐसे में बिना राज्य के सरकार का और बिना सरकार के राज्य  का अध्ययन अपूर्ण रह जाएगा । ऐसे में पाल जेनेट नें लिखा कि “राजनिति विज्ञान समाज विज्ञान का वह अंग है  जिसमें राज्य के आधार पर और सरकार के सिद्वान्तों का अध्ययन किया जाता है ।

गिल क्राइस्ट ने परिभाषा दी कि राजनिति विज्ञान राज्य और सरकार का सामान्य समस्याओं का अध्ययन करता है

सामान्य तौर पर राजनिति विज्ञान मुख्य रुप से मानव राजनितिक जीवन का , राज्य का, सरकार का, स्थानीय राष्ट्रीय मताधिकार का , अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं का राजनितिक विचार का तथा अंतर्राष्ट्रीय विधि एवं सम्बन्धित सगंठन का अध्ययन है

दैवीय    मानवीय  उदारवादी      नकारात्मक व्यक्ति


दैवीय  मानवीयसकारात्मक समाज साम्यवाद लोकतांत्रिक कानून

 आधुनिक परिभाषाः-

-   राजनितिक विज्ञान मानव से सम्बन्धित है ।

-   राजनितिक विज्ञान राजनितिक व्यवस्था का अध्ययन है ।

-  राजनितिक विज्ञान निर्णय निर्माण प्रक्रिया का अध्ययन है ।

 शक्ति तीन प्रकार की होती हैः-

a)    प्रभावी शक्ति – शिक्षक

b)    चातुर्थ शक्ति  - नेता

c)      दण्ड शक्ति   - पुलिस

-  दूसरे के विचारों को अपने अनुसार परिवर्तित करना शक्ति कहलाती है ।

-  व्यक्ति हमेशा निर्णय लेता है , निर्णय हमेशा हित या अहित में होगा तो यह राजनिति विज्ञान है ।

-  राजनितिक विज्ञान एक ऐसे विज्ञान है , जो सरकार , मान क्रिया , निर्णय निर्माण , राजनितिक व्यवस्था का अध्ययन करती है ।

 आवश्यकता   मांग        निवेश    मशीनरी       निर्गत


 

समाजिक व्यवस्था का संचालन एक व्यवस्थित क्रम में होता है । इसी को राजनिति विज्ञान कहते है ।

राजनिति विज्ञान का स्वरुपः-

 राजनिति विज्ञान नहीं हैः-  इसके लिए कुछ तर्क / आपत्तियाँ  हैं –

 राजनिति विज्ञान में सर्वमान्य तथ्यों का अभाव है  ऐसें में हम इसें विज्ञान नही मान सकते है ।

 कार्य और कारण में निश्चित सम्बन्ध का अभाव है । मार्क्स नें वैज्ञानिक समाज स्थापित करने की । इसने राजनिति में एक निश्चित कार्य और कारण को बताने का प्रयास किया और बताया कि आर्थिक शक्तियों के परिवर्तन से समाज परिवर्तित हो जाता है । समाज को बदलने के कारण आर्थिक शक्ति सम्बन्ध है ।









परवेक्षण और परीक्षण का अभावः-. ब्राइस – भौतिक विज्ञान में निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए बार बार प्रयोग किया जा सकता है  किन्तु राजनिति विज्ञान में प्रयोग एक ही बार किया जा सकता है । यहां यह कहना कठिन है कि उसकी कोई प्रयोगशाला हो , एक समान परिस्थितियाँ दोबारा नही हो सकती  है ।

मानव स्वभाव की परिवर्तनशीलताः-  मनुष्य की परिवर्तनशीलता में कोई परिवर्तन निकालना कठिन है । प्रत्येक व्यक्ति का अलग अलग स्वभाव होता है ।

भविष्यवाणी की क्षमता का अभावः-  बर्क के अनुसार राजनिति में भविष्य करना मूर्खता है । यह सही सही बतलाया जा सकता है कि सूर्यग्रहण , चन्द्रगृहण  कब होगा किन्तु युद्व कब होगा  किसी विचार का जनता पर क्या प्रभाव होगा । यह नही बताया जा सकता है ।

         -  राजनिति विज्ञान का विषय आत्मपरख है वस्तु परख जबकि विज्ञान वस्तु परख होता है ।

         -  मेटलैण्ड में जब  में राजनिति विज्ञान के सम्बन्ध में कोई परीक्षा प्रश्न देखता हूं तो मुझे प्रश्न पर नही वरन् शीर्षक पर खेद होता है ।

राजनिति विज्ञान एक विज्ञान के रुप मेः-

§  राजनिति विज्ञान का ज्ञान क्रमबृद्व एवं व्यवस्थित है । राजनिति विज्ञान का अध्ययन सामग्री की प्रकृति में स्थायित्व और एकरुपता है ।

§   सर्वमान्य तथ्य पाए जाते है ।

§  कार्य और कारण में पारस्परिक सम्बन्ध है ।

§  परपेक्षण तथआ परीक्षण संभव है – राज्य की जनता को प्रयोगशाला मान सकते है  , विभिन्न संगठनों को बनाकर परीक्षण संभव है ।

§  भविष्यवाणी की क्षमता हैः- डा0 फाइनर के शब्दो मे, “भौतिक विज्ञान की तरह भविष्यवाणी नही की जा सकती है किन्तु संभावनाएँ तो व्यक्त की ही जा सकती है”


राजनिति विज्ञान एक कला के रुप मेः-

कुछ विद्वानों का मानना है कि राजनितिक विज्ञान एक विज्ञान है तो कला नही हो सकती  क्योंकि दोनों  एक- दूसरे के परस्पर विरोधी होते है । लेकिन विलयम एस्लिंग का मानना है कि दोनों का विरोधी होना जरुरी है । कभी कभी कला भी विज्ञान पर आधारित होती है । राजनिति विज्ञान की यह बात पूरी तरह लागू होती है ।

कला ऐसे ज्ञान को कहा जाता है जिसका उद्देश्य मानव जीवन को सुन्दर बनाना है । सत्यम, शिवम , सुन्दरम की साधना की कला है । चूंकि राजनिति विज्ञान का उद्देश्य भी मानव जीवन को नैतिक और सुन्दर बनाना है । अतः राजनिति विज्ञान कला है । ब्यूसली  का कथन है कि राजनिति विज्ञान से विज्ञान की अपेक्षा कला का ही अधिक बोध होता है

चूकिं राजनिति विज्ञान में भूत, वर्तमान और भविष्य के साथ साथ राज्य के आय के स्वरुप का अध्ययन किया जाता है । इसका भी अधिक जन कल्याणकारी कैसे होगा लोगों को अधिक से अधिक स्वतंत्रता समानता न्याय कैसे प्राप्त होगा । ऐसे में राजनिति, विज्ञान कम  , कला अधिक है 

वर्तमान में विज्ञान ने समाज  में विभिन्न प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न कर दी है , पर्यावरणीय समस्याएँ , भौतिकता के कारण , अपराध , भ्रष्टाचार आदि ऐसे में विनाश से विश्व को बचाने में समय समर्थ केवल कला हो सकती है , अतः राजनिति विज्ञान कला है।

 उपरोक्त व्यवस्थाओं के आधार पर हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते है । कि राजनिति में तो केवल पूर्णतः विज्ञान है (भौतिक विज्ञान) और नही यह शुद्वता कला ( मार्शल आर्ट्स) कैटलिन ने लिखा कि राजनिति कला दर्शन और विज्ञान तीनों है । इसी प्रकार लास्विन ने भी  माना की राजनिति कला , विज्ञान और दर्शन का सम्मिश्रण है । 

By-  A. K. Pandey

No comments:

Post a Comment

Thanks for your love

Summary in short

Current Affairs Questions And answers

  Question 1. Consider the following statements- 1) The World Economic Forum issues the Global Energy Transition Index every year. 2) In...