Thursday, January 14, 2021

गुरुकुल की शिक्षा पद्धति (Education system of GURUKUL)

 
प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति का एक प्रमुख तत्व गुरुकुल व्यवस्था है  इसमें विद्यार्थी अपने घर से गुरु के घर पर निवास पर शिक्षा प्राप्त करता था कभी-कभी वहां शिक्षा केंद्रों से संबंध छात्रावासों में निवास करता था इस प्रकार के विद्यार्थियों को अंतेवासी अथवा आचार्य कुलवासी कहां गया है
 विद्यार्थी संस्कार के साथ गुरुनिवाकरे विविध विषयों की शिक्षा प्राप्त करें का गुरु  के समीप रहते हुए विद्यार्थी उसके परिवार का एक सदस्य हो जाता था तथा गुरुकुल में ब्रम्हचर्य पूर्वक  रहते हुए विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करता था 
 वहां उसे गुरु के पहले उठना तथा उसके सो जाने पर सोना पड़ता था गुरु की सेवा करना उसका परम कर्तव्य था उसकी सेवाओं के बदले में गुरु भी उसके ऊपर व्यक्तिगत ध्यान रखता था तथा पूरी लगन के साथ उसे विविध विद्याओं और कलाओं की शिक्षा प्रदान करता था  प्राचीन व्यवस्थाकारों ने गुविद्यार्थी के सानिध्य महत्व को समझा था और इसी कारण गुरुकुल पद्धति पर बल दिया गुरु के चरित्र तथा आचरण का शिष्य के मस्तिष्क पर सीधा प्रभाव पड़ता था तथा वह उसकाअनुकरण करता था
 परिवार की वातावरण से दूर रहने के कारण उसमें आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती थी तथा वह संसार की गतिविधियों से अधिक अच्छा परिचय प्राप्त कर सकता था उसमें अनुशासन की प्रवृत्ति का भी उदय होता था इसी कारण महाभारत में गुरुकुल की शिक्षा को घर की शिक्षा की अपेक्षा अधिक प्रशंसनीय बताया गया है
 गुरुकुल सदैव वनों में ही स्थित नहीं होते थे अधिकांशत गुरुकुल ग्रामों तथा नगरों में अवस्थित होते थे शिक्षक गृहस्थी और स्वाभाविक रूप से वे उन्हें अपने निवास स्थान के समीप ही रखते थे यह आवश्यक था कि गुरुकुल ग्राम या नगर में किसी उपवन या एकांत स्थान पर स्थित हो
 प्राचीन साहित्य में गुरुकुल ओं में रहकर अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के नाम मिलते हैं ज्ञात होता है कि इतिहास के विभिन्न युगों में शिक्षा की गुरुकुल पद्धति का प्रचलन था विष्णु पुराण से ज्ञात होता है कि कृष्ण तथा बलराम ने संदीपनी के आश्रम में रहकर अध्ययन किया था
 रामायण में भरत वाज तथा बाल्मीकि की गुरुकुल ओं का उल्लेख मिलता है महाभारत से ज्ञात होता है कि कल तथा मार्कंडेय ऋषि यों के आश्रमों में प्रसिद्ध शिक्षा केंद्र थे मुनि दुर्वासा की आश्रम में 10000 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते थे ऐतिहासिक काल में हम देखते हैं कि चंद्रगुप्त मौर्य ने तक्षशिला की आचार्य चाणक्य के साथ रहकर शिक्षा प्राप्त की थी
 गुप्त युग में ब्राह्मणों को जो भूमि दान दिया जाता था उसे अग्रहार कहा जाता था  जी अग्रवाल भी शिक्षा के प्रमुख केंद्र थे हर्ष चरित्र में गुरुकुल का उल्लेख मिलता है अलबेरूनी की विवरण से पता लगता है कि पूर्व मध्य युग में शिक्षा प्रदान करने के नियमित कई गुरुकुल की स्थापना की गई थी
 इस प्रकार स्पष्ट है कि प्राचीन इतिहास के प्रायः प्रत्येक युग में शिक्षा के लिए गुरुकुल पद्धति का प्रचलन था वस्तुतः गुरुकुल उच्च अध्ययन की नियमित होते थे जातक गुणों से पता चलता है कि विद्यार्थी प्रायः 14 15 वर्ष की बड़ी आयु में गुरुकुल में अध्ययन की नियमित जाया करते थे कभी-कभी माता पिता अपने बालकों यदि गुरुकुल उसके निवास स्थान में स्थित होते थे तो वहां रहने के लिए नहीं भेजते थे तथा उसे अपने साथ ही रखते थे
 इसके विपरीत कुछ ऐसे उदाहरण भी मिलते हैं जहां अभिभावक अपने बालकों को समीप के शिक्षा केंद्रों को छोड़कर दूरस्थ शिक्षा केंद्र में अध्ययन के नियमित प्रेषित करते थे ताकि परिवार का आकर्षण उनके अध्ययन में बाधा ना उत्पन्न कर पाए

1 comment:

Thanks for your love

Summary in short

Current Affairs Questions And answers

  Question 1. Consider the following statements- 1) The World Economic Forum issues the Global Energy Transition Index every year. 2) In...