Sunday, January 24, 2021

अखिल भारतीय सेवा की भूमिका

स्वतंत्रता के उपरांत भारत में शासन की संघवादी व्यवस्था को अपनाया गया संविधान के अंतर्गत केंद्रीय सरकार तथा राज्यों के प्रशासन के लिए प्रथक-प्रथक लोक सेवाओं के प्रावधान किए गए केंद्रीय स्तर पर केंद्रीय सेवाओं तथा राज्य स्तर पर राज्य सेवाओं की स्थापना की गई केंद्रीय सेवाओं के कर्मचारी प्रतिरक्षा आयकर सीमा शुल्क डाक तार आदि संघी विषयों के प्रशासन का कार्य करते हैं उसी प्रकार राज्य सेवाओं के कर्मचारी भू राजस्व कृषि शिक्षा स्वास्थ्य आदि राज्य सूची के विषयों पर प्रशासन का कार्य करते हैं
भारतीय प्रशासनिक प्रणाली में उपरोक्त दो सेवाओं के अतिरिक्त अखिल भारतीय सेवाओं की भी स्थापना की गई है यह सेवाएं संघ तथा राज्य दोनों के लिए सामान्य रूप से संगठित की गई हैं इन सेवाओं को गठित करने का प्रमुख उद्देश्य देशभर में प्रशासन स्थल में एकरूपता लाने तथा उच्च स्तरीय पदों पर काम करने हेतु अनुभवी एवं प्रशिक्षित अधिकारियों का वर्ग तैयार करने के लिए यूपीएससी द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से अखिल भारतीय आधार पर सीधी भर्ती करना था

भारतीय संविधान में अखिल भारतीय सेवाओं से संबंधित प्रावधान किया गया है संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार राज्य सभा अपनी उपस्थिति और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो तिहाई सदस्यों द्वारा समर्थित प्रस्ताव के आधार पर संसद अखिल भारतीय सेवाओं का गठन कर सकती है इस विषय में राज्यों से भी परामर्श किया जा सकता है संविधान में भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं भारतीय पुलिस सेवा का उल्लेख किया गया है इसके अतिरिक्त 1966 में भारतीय वन सेवा का गठन किया गया हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय न्यायिक सेवा की स्थापना हेतु कदम उठाने का निर्देश संघ सरकार को दिया है
अखिल भारतीय सेवाओं में भर्ती एवं प्रशिक्षण के लिए केंद्र सरकार को उत्तरदाई माना गया है आईएएस आईपीएस की भर्ती सिविल सेवा परीक्षा द्वारा होती है जबकि आई एफ एस के लिए संघ लोक सेवा आयोग द्वारा अलग से प्रतियोगी परीक्षा का आयोजन किया जाता है आईएएस के लिए लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय आईपीएस के लिए गृह मंत्रालय तथा आईएएस के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय नियंत्रण प्राधिकारी हैं इन सेवाओं की अन्य सेवा शर्तों का निर्धारण केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है एवं संबंधित राज्य सरकार निर्धारित की गई सेवा शर्तों के अनुपालन के लिए बाध्य मानी जाती हैं

अखिल भारतीय सेवाओं की दो मूल विशेषता होती है 
1-कैडर प्रणाली, 
2- अवधी प्रणाली, 

 कैडर प्रणाली का तात्पर्य यह है कि अखिल भारतीय सेवाओं की भर्ती और प्रशिक्षण के लिए केंद्र सरकार को उत्तरदाई माना गया है परंतु इन सेवाओं के सदस्यों से संबंधित राज्य सरकारों के अधीन अपनी सेवाएं प्रदान करनी होती है इसके अतिरिक्त अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी प्रणाली के अंतर्गत निर्धारित समय सीमा के लिए केंद्र सरकार के अधीन अपनी सेवाएं प्रस्तुत करते हैं तथा अवधि प्रणाली का कार्यकाल पूरा करने के उपरांत पुनः संबंधित राज्य सरकार की सेवा में वापस चले जाते हैं अखिल भारतीय सेवा के सदस्यों पर अंतिम नियंत्रण केंद्र सरकार का होता है परंतु संचालन के दृष्टिकोण से नियंत्रण करने का अधिकार संबंधित राज्य सरकार को दे दिया गया है

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